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चांद मेरा दिल: एक कमजोर रोमांटिक फिल्म की समीक्षा

‘चांद मेरा दिल’ एक रोमांटिक फिल्म है जिसमें अनन्या पांडे और लक्ष्य ने मुख्य भूमिका निभाई है। विवेक सोनी द्वारा निर्देशित इस फिल्म की कहानी आरव और चांदनी के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने परिवारों के खिलाफ जाकर शादी करने का निर्णय लेते हैं। हालांकि, फिल्म की स्क्रिप्ट कमजोर है और कई जगह कहानी खींची हुई लगती है। क्या यह फिल्म देखने लायक है? जानने के लिए पढ़ें पूरी समीक्षा।
 

फिल्म का परिचय

फिल्म का नाम: चांद मेरा दिल
निर्देशक: विवेक सोनी
कलाकार: अनन्या पांडे, लक्ष्य
लेखक: विवेक सोनी, तुषार परांजपे
रेटिंग: 2.5/5


रोमांटिक मूवी का नया दौर

‘सैयारा’ की सफलता के बाद, बॉलीवुड में रोमांटिक फिल्मों की लहर फिर से देखने को मिल रही है। ‘तू मेरी मैं तेरा’, ‘दो दीवाने सहर में’, ‘एक दिन’ और अब अनन्या पांडे और लक्ष्य की ‘चांद मेरा दिल’ भी इसी श्रेणी में आती है। इस फिल्म का निर्देशन विवेक सोनी ने किया है और यह करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शन के तहत बनी है।


फिल्म की कहानी

कहानी आरव से शुरू होती है, जो अमेरिका से पढ़ाई पूरी करके भारत लौटता है। उसे चांदनी का वीडियो कॉल आता है, जिसमें वह बताती है कि वह काम के कारण एक इवेंट में शामिल नहीं हो पाएगी। आरव थोड़े उदास होते हैं और सोचते हैं कि अगर वे मिलते तो कहानी अलग होती।


फिल्म का फ्लैशबैक दिखाता है कि आरव और चांदनी इंजीनियरिंग कॉलेज में मिले थे और दोनों के बीच प्यार हो गया। हालांकि, उनके परिवारों की सोच अलग थी। आरव के माता-पिता को हमेशा इमेज की चिंता थी, जबकि चांदनी ने घरेलू हिंसा का सामना किया।


दोनों ने शादी करने का फैसला किया, लेकिन यह सवाल उठता है कि इतनी जल्दी और जिद करने की क्या जरूरत थी। शादी के बाद आरव की प्रोफेशनल लाइफ में समस्याएं आने लगती हैं, जिससे उसकी चांदनी के प्रति नजरिया बदल जाता है।


अभिनय का स्तर

फिल्म का निर्देशन किस पीढ़ी के लिए किया गया है, यह सवाल उठता है। लक्ष्य ने अपने अभिनय से प्रभावित किया है, जबकि अनन्या ने भी अच्छा काम किया है। फिल्म में परेश पाहुजा, चारु और मनीष चौधरी ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया है।


निर्देशन और स्क्रीनप्ले

विवेक सोनी ने फिल्म की कहानी तुषार परांजपे के साथ मिलकर लिखी है। फिल्म का पहला भाग थोड़ा खींचा हुआ लगता है और कई जगह कहानी को जबरदस्ती आगे बढ़ाया गया है।


फिल्म का संगीत

फिल्म का संगीत करण जौहर की फिल्म होने के नाते उम्मीदों पर खरा उतरता है। श्रेया घोषाल का गाया टाइटल ट्रैक शानदार है और फिल्म में विभिन्न मूड के गाने शामिल हैं।


सिनेमैटोग्राफी और वीएफएक्स

फिल्म की सिनेमैटोग्राफी ठीक है, लेकिन वीएफएक्स कुछ जगह कमजोर नजर आता है। एक दृश्य में अनन्या ट्रेन से जा रही होती हैं, जहां वीएफएक्स की कमी साफ दिखाई देती है।


क्या फिल्म देखें?

अगर आप अनन्या और लक्ष्य के फैन हैं और रोमांटिक फिल्में पसंद करते हैं, तो इसे देख सकते हैं। हालांकि, यह फिल्म ओटीटी पर ज्यादा पसंद की जाती।