क्या सोने की कीमतों में और गिरावट आएगी? जानें ऐतिहासिक आंकड़ों से
सोने की कीमतों में गिरावट का विश्लेषण
नई दिल्ली। क्या सोने का सुनहरा युग समाप्त हो गया है? क्या कीमतें और नीचे जाएंगी? हाल की गिरावट ने इस सवाल को लोगों के बीच चर्चा का विषय बना दिया है। पिछले वर्ष 65% रिटर्न देने के बाद, सोने ने 2026 की शुरुआत में तेजी दिखाई, लेकिन ईरान-अमेरिका संघर्ष के बाद इसकी कीमतों में गिरावट आई है। जनवरी में सोने की कीमतें 5,602 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं, लेकिन अब यह तीन महीनों में घटकर 4,495 डॉलर हो गई हैं, जो कि 20% की कमी को दर्शाती है।
सोने की कीमतों में तेजी का सिलसिला अक्टूबर 2022 से शुरू हुआ था। सोने की कीमतें अक्टूबर 2022 में 1,500 डॉलर से बढ़कर जनवरी 2026 में 5,602 डॉलर तक पहुंच गईं। क्या सोने की कीमतें और गिर सकती हैं? इस सवाल का उत्तर ऐतिहासिक आंकड़ों से लगाया जा सकता है। सोने में तेजी का यह सिलसिला नया नहीं है, ऐसा पहले भी हो चुका है। आइए, हम आपको सोने के ऐतिहासिक पैटर्न के बारे में बताते हैं, जिसमें सोने ने तेजी के बाद भारी गिरावट दिखाई है।
सोने की कीमतों में गिरावट का इतिहास
इतिहास में कम से कम तीन बार सोने ने नए शिखर बनाए हैं और उसके बाद भारी गिरावट देखी गई है। इस कीमती धातु में बड़े उछाल के बाद गिरावट आना कोई नई बात नहीं है।
सोने की कीमतों में पहली बार भारी गिरावट 1974 से 1976 के बीच देखी गई। अगस्त 1971 से नवंबर 1974 के बीच सोने की कीमतों में 353% की वृद्धि हुई, जिसके बाद नवंबर 1974 से अगस्त 1976 के बीच 43% की गिरावट आई। यह गिरावट मुख्य रूप से मुद्रास्फीति में कमी, ब्याज दरों में वृद्धि, मजबूत आर्थिक विकास और डॉलर के मजबूत होने के कारण हुई। इसके अलावा, मध्य पूर्व में तेल संकट के स्थिर होने और वियतनाम युद्ध की समाप्ति के बाद भू-राजनीतिक जोखिमों में कमी आई थी।
1980 का दशक क्या कहता है?
1980 के दशक में सोने की कीमतों में दूसरी बार बड़ी गिरावट का दौर आया। अगस्त 1976 से सितंबर 1980 के बीच 541% की तेजी के बाद, सितंबर 1980 से जून 1982 के बीच सोने की कीमतें 52% टूट गईं। यह सिलसिला यहीं नहीं थमा, क्योंकि दूसरी गिरावट के तुरंत बाद सोने की कीमतों में मंदी का एक और दौर आया, जिसमें जून 1982 के बाद सोने की कीमतों में 57% की वृद्धि हुई, लेकिन जनवरी 1983 से फरवरी 1985 के बीच इसमें 42% की गिरावट दर्ज की गई।
क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?
1980 के दशक में सोने की कीमतों में भारी गिरावट का कारण ब्याज दरों में बढ़ोतरी थी। महंगाई में वृद्धि के कारण तत्कालीन फेड चेयरमैन पॉल वोल्कर ने ब्याज दरें बढ़ाईं। मजबूत डॉलर और उच्च ब्याज दरें सोने की कीमतों के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं।
1999 से 2011 का वक्त
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, अगस्त 1999 से अगस्त 2011 के बीच सोने की कीमत में 612% की बढ़ोतरी हुई, जो 1971 के बाद से सबसे लंबी तेजी थी। लेकिन इसके बाद अगस्त 2011 के अंत से दिसंबर 2015 तक इसमें 42% की गिरावट आई।
2011 के बाद सोने की कीमतों में गिरावट के खास कारण
अमेरिका में आर्थिक मंदी के बाद, केंद्रीय बैंकों ने मौद्रिक नीति में ढील देना शुरू कर दिया, जिससे सोने का मूल्य गिरने लगा। 2011 से सेंट्रल बैंकों के Quantitative Easing Program में कमी आने के कारण, सोने को सुरक्षित निवेश या डिफेंसिव एसेट के रूप में रखने की आवश्यकता कम हो गई। इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर मजबूत होने लगा और आर्थिक संकेतकों में सुधार ने सोने के आकर्षण को कम कर दिया।
अब 2026 में क्या होगा?
अगर 2026 में सोने की कीमत अपने रिकॉर्ड हाई से औसतन 50% तक गिरती है, तो यह लगभग 2,800-3,000 डॉलर तक पहुंच जाएगी। ऐसे में भारतीय रुपयों में सोने की कीमत 85,300 से 91,400 रुपये प्रति दस ग्राम तक जा सकती है।
मार्च से जून 2025 के बीच सोने की कीमत इन्हीं स्तरों पर थी। कई मार्केट एक्सपर्ट 3,600 डॉलर के स्तर की ओर इशारा कर रहे हैं। ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से सोने को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। तेल की ऊंची कीमतें न केवल अमेरिकी डॉलर को मजबूत कर रही हैं, बल्कि मुद्रास्फीति को भी बढ़ा रही हैं। ऐसे में हो सकता है कि अमेरिकी फेड ब्याज दरों में कटौती ना करे, जो सोने के लिए काफी नकारात्मक होगा।