आमिर खान ने ‘घोस्ट डायरेक्टिंग’ के आरोपों को किया खारिज
आमिर खान का करियर और शुरुआती चुनौतियाँ
आमिर खान, जिन्हें आज बॉलीवुड का 'मिस्टर परफेक्शनिस्ट' माना जाता है, ने अपने करियर की शुरुआत में कई कठिनाइयों का सामना किया। अपने समकालीन कलाकारों से प्रतिस्पर्धा करने के लिए उन्होंने एक साथ नौ से अधिक फिल्में साइन की थीं, लेकिन यह निर्णय उनके लिए सही साबित नहीं हुआ। 'कयामत से कयामत तक' की सफलता के बाद भी उनकी कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल रहीं, जिसके कारण उन्हें 'वनफिल्म वंडर' का टैग मिला।
आमिर खान का फिल्म चयन में बदलाव
आमिर ने फिर अपने तरीके में बदलाव करते हुए सावधानी से फिल्में चुननी शुरू कीं। उन्होंने एक समय में केवल एक फिल्म करने का निर्णय लिया, जिसने उनके करियर को नया मोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने 'दिल है कि मानता नहीं', 'जो जीता वही सिकंदर', 'रंगीला', 'राजा हिंदुस्तानी', 'लगान', 'रंग दे बसंती', '3 इडियट्स', और 'दंगल' जैसी कई सफल फिल्में दीं। हालांकि, उनकी सफलता और परफेक्शन के प्रति जुनून ने कुछ लोगों को यह सोचने पर मजबूर किया कि आमिर ही अपनी फिल्मों के सभी निर्णय लेते हैं, जिससे उन्हें 'घोस्ट डायरेक्ट' कहा जाने लगा।
आमिर खान का स्पष्टीकरण
61 वर्ष की उम्र में, आमिर खान ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा, "मेरे 38 साल के करियर में, मैंने केवल एक फिल्म 'तारे ज़मीन पर' का निर्देशन किया है। बाकी सभी फिल्में मैंने डायरेक्ट नहीं की हैं, चाहे मीडिया कुछ भी कहे।" उन्होंने यह भी कहा कि अगर वह अच्छा काम कर रहे हैं, तो वह किसी और का नाम क्यों देंगे।
फिल्म निर्माण की चुनौतियाँ
आमिर ने यह भी बताया कि उन्होंने जिन निर्देशकों के साथ काम किया है, उन्होंने अपने प्रोजेक्ट्स में अनोखी ऊर्जा डाली है। उन्होंने कहा, "अगर मैं अपनी सभी फिल्मों को खुद डायरेक्ट करता, तो वे सभी एक जैसी होतीं। हर निर्देशक ने अपनी फिल्म में अलग दृष्टिकोण और व्यक्तित्व डाला है।" उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म निर्माण एक कठिन कार्य है और बहुत कम लोग लगातार सफल फिल्में बना पाते हैं।