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बदरुद्दीन अजमल ने कांग्रेस को मुस्लिम लीग से जोड़ा, असम में अल्पसंख्यक राजनीति पर उठे सवाल

बदरुद्दीन अजमल ने कांग्रेस की तुलना मुस्लिम लीग से की है, जिससे असम में अल्पसंख्यक राजनीति पर सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस ने 126 विधानसभा सीटों में से 20 से अधिक मुस्लिम उम्मीदवारों को उतारा, लेकिन क्या यह रणनीति सफल रही? जानिए असम में कांग्रेस के जीते हुए मुस्लिम विधायकों की सूची और बीजेपी के आरोपों के बारे में। क्या कांग्रेस ने असम के मुस्लिम वोटरों को साधने में सफलता पाई? इस लेख में इन सभी सवालों का जवाब दिया गया है।
 

कांग्रेस और मुस्लिम लीग की तुलना

ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने हाल ही में कांग्रेस की तुलना मुस्लिम लीग से की है। असम में कांग्रेस के जीते हुए विधायकों की संख्या इस बात की ओर इशारा करती है कि अजमल ने ऐसा बयान क्यों दिया, जबकि वह खुद मुसलमानों की राजनीति में सक्रिय हैं। कांग्रेस की अल्पसंख्यक राजनीति अब कई राज्यों में उसके लिए चुनौतियाँ पैदा कर रही है।


भारतीय जनता पार्टी ने यह संदेश फैलाने में सफलता पाई है कि कांग्रेस हिंदू विरोधी राजनीति कर रही है। असम से लेकर पश्चिम बंगाल तक, कांग्रेस को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा है। चुनाव परिणाम भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि अब कांग्रेस के पास केवल अल्पसंख्यक वोटर बचे हैं, जबकि बहुसंख्यक हिंदू समाज भारतीय जनता पार्टी या अन्य दलों की ओर बढ़ रहा है।


कांग्रेस की मुस्लिम उम्मीदवारों की संख्या

कांग्रेस ने असम की 126 विधानसभा सीटों में से 20 से अधिक सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था। 2011 की जनगणना के अनुसार, असम की कुल मुस्लिम आबादी लगभग 31 प्रतिशत है। कांग्रेस ने बीजेपी की हिंदुत्व राजनीति की आलोचना की, जबकि बीजेपी ने कांग्रेस पर तुष्टीकरण का आरोप लगाया।


कांग्रेस को असम में 29 प्रतिशत से अधिक वोट मिले, जिसमें से 19 विधायक जीते, जिनमें से 18 मुस्लिम हैं। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की दो सीटें आईं, और दोनों विधायक मुस्लिम हैं। तमिलनाडु में एक मुस्लिम विधायक है, जबकि केरल में 7 से अधिक मुस्लिम विधायक हैं।


असम में जीते हुए मुस्लिम विधायकों की सूची


  • परबतझोरा: एमडी अशरफुल इस्लाम शेख

  • गौरीपुर: अब्दुस सोबहान अली सरकार

  • धुबरी: बेबी बेगम

  • वीरसिंह जरुआ: वाजेद अली चौधरी

  • मनकाचार: मोहिबुर रहमान (बप्पी)

  • जलेश्वर: आफताब उद्दीन मुल्ला

  • गोवालपाड़ा ईस्ट: अबुल कलाम राशिद आलम

  • श्रीजनग्राम: एमडी. नुरुल इस्लाम

  • चेंगा: अब्दुर रहीम अहमद

  • पाकाबेटबाड़ी: जाकिर हुसैन सिकदार

  • चामरिया: रेकीबुद्दीन अहमद

  • लहरीघाट: डॉ. आसिफ मोहम्मद नजर

  • रूपहीहाट: नुरुल हुदा

  • समागुरी: तंजील हुसैन

  • सोनाई: अमीनुल हक लस्कर

  • अलगापुर-कटलीचेरा: जुबैर अनाम मजूमदार

  • करिमगंज नॉर्थ: जाकारिया अहमद

  • करिमगंज साउथ: अमीनुर राशिद चौधरी


कांग्रेस के हिंदू विधायकों की हार

कांग्रेस के जीते हुए एकमात्र हिंदू विधायक डॉ. जय प्रकाश दास हैं, जो नौबेचा से चुने गए हैं। राज्य में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार गौरव गोगोई अपनी विधानसभा जोरहाट भी नहीं बचा सके।


बदरुद्दीन अजमल ने कांग्रेस की तुलना मुस्लिम लीग से की है, जो कि दिलचस्प है। अजमल को कांग्रेस ने बीजेपी की बी टीम बताया है। कांग्रेस ने चुनाव में बार-बार कहा कि अजमल सांप्रदायिक राजनीति कर रहे हैं, जो हिंदू ध्रुवीकरण में मदद करती है।


क्या कांग्रेस ने असम के मुस्लिमों को साधा?

2011 की जनगणना के अनुसार, असम की कुल आबादी में 35 प्रतिशत मुसलमान हैं। असम में विधानसभा की कुल सीटों की संख्या 126 है, जिनमें से 30 से अधिक सीटों पर मुस्लिम वोटर जीत-हार तय करते हैं। कांग्रेस ने 19 सीटें जीतीं, जबकि AIUDF ने दो सीटों पर जीत हासिल की।


कांग्रेस को अल्पसंख्यक बाहुल सीटों में 10 से अधिक सीटों का नुकसान हुआ। असम में कांग्रेस ने दमखम तो दिखाया, लेकिन ओवैसी और अजमल के प्रभाव ने नुकसान भी पहुँचाया।


क्यों हारे असम के हिंदू उम्मीदवार?

असम में बीजेपी ने घुसपैठ को चुनावी मुद्दा बनाया। कांग्रेस पर आरोप लगाया गया कि वह घुसपैठियों को शरण देती है और मुस्लिमों का तुष्टीकरण करती है। हिमंता बिस्व सरमा ने सार्वजनिक सभाओं में बार-बार कहा कि असम की जनसंख्या असंतुलित हो रही है।


उन्होंने कहा कि मुसलमानों की आबादी बढ़ रही है, जबकि हिंदुओं की नहीं। असम में जनसांख्यिकी असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो रही है। केंद्रीय गृहमंत्री और अन्य नेताओं ने बार-बार कहा कि धुबरी, बारपेटा, दरांग, और अन्य जिलों में घुसपैठियों की संख्या बढ़ गई है।