पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: बीजेपी का घोषणापत्र और यूसीसी का मुद्दा
पश्चिम बंगाल में चुनावी तैयारियां तेज
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान कुछ ही दिनों में होने वाला है। सभी राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है और जोरदार प्रचार कर रहे हैं। मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बीच है। बीजेपी ने चुनावी रणनीति के तहत अपना घोषणापत्र शुक्रवार को जारी किया, जिसमें एक महत्वपूर्ण वादा किया गया है कि पार्टी राज्य में सत्ता में आने के छह महीने के भीतर समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करेगी। इसके साथ ही, पार्टी ने बंगाल की जनता से कई अन्य वादे भी किए हैं, जिससे हिंदू बनाम मुस्लिम वोटों के बीच घमासान छिड़ गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
विश्लेषकों का मानना है कि इस वादे से बीजेपी को हिंदू मतों को एकजुट करने में मदद मिल सकती है, जबकि टीएमसी अपने मजबूत अल्पसंख्यक आधार को फिर से संगठित करने की कोशिश कर सकती है। अमित शाह ने घोषणापत्र जारी करते हुए टीएमसी पर तीखा हमला किया।
अमित शाह का प्लान
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कोलकाता में बीजेपी के संकल्प पत्र को पेश करते हुए कहा कि बंगाल में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होगा। उन्होंने कहा, 'बीजेपी शासित कई राज्यों में यूसीसी लागू हो चुका है। हम छह महीने के भीतर इसे बंगाल में भी लागू करेंगे।'
घुसपैठ और मवेशी तस्करी पर ध्यान
बीजेपी के घोषणापत्र में यूसीसी के वादे के साथ-साथ घुसपैठ और मवेशी तस्करी को रोकने का भी संकल्प लिया गया है। यह माना जा रहा है कि इससे चुनावी चर्चा में सीमा सुरक्षा और तुष्टीकरण की राजनीति को बल मिलेगा। यूसीसी सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने के मामलों में समान कानून है।
चुनाव से पहले उठाया गया मुद्दा
बीजेपी ने 23 अप्रैल को मतदान से ठीक दो हफ्ते पहले यूसीसी का मुद्दा उठाया है। यह मुद्दा महत्वपूर्ण है क्योंकि पश्चिम बंगाल में मुस्लिम आबादी लगभग 30 प्रतिशत है और विधानसभा की 294 सीटों में से 110 पर अल्पसंख्यक मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। अमित शाह ने कहा, 'क्या सभी नागरिकों के लिए एक ही कानून होना तुष्टीकरण है? यूसीसी तुष्टीकरण को समाप्त करता है।'
आलोचनाओं का सामना
यूसीसी के मुद्दे पर बीजेपी की आलोचना हो रही है। आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा गया कि 'समान नागरिक संहिता की सिफारिश बीजेपी की नहीं, बल्कि संविधान सभा की थी।' टीएमसी ने अमित शाह के बयानों को सांप्रदायिक बताया और चुनाव को सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगाया।
टीएमसी के आरोप
तृणमूल के वरिष्ठ नेताओं ने यूसीसी की घोषणा को मतदाताओं को ध्रुवीकृत करने का एक सुनियोजित प्रयास बताया। उन्होंने बीजेपी पर अल्पसंख्यकों के बीच भय फैलाकर हिंदू वोटों को एकजुट करने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले भी यूसीसी की आलोचना की है।
मुस्लिम वोटों का एकजुट होना
हाल के दो महीनों में मुस्लिम बहुल इलाकों में टीएमसी को चुनौती का सामना करना पड़ा था। छोटे संगठन जैसे इंडियन सेकुलर फ्रंट और एआईएमआईएम ने स्वतंत्र मुस्लिम आवाज के रूप में खुद को स्थापित करने की कोशिश की थी। हालांकि, चुनाव से पहले एक वीडियो सामने आने से गठबंधन टूट गया है, जिससे टीएमसी को लाभ मिल सकता है।