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पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 से पहले ED की बड़ी कार्रवाई: TMC के रणनीतिकार गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के रणनीतिकार विनेश चंदेल को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी कोयला घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में हुई है। इस कार्रवाई ने चुनावी माहौल में हलचल मचा दी है, जिससे TMC के प्रचार अभियान को बड़ा झटका लग सकता है। ED की जांच में सामने आया है कि चंदेल के खिलाफ आरोपों की जड़ें राजनीतिक रणनीतिकारों से जुड़ती हैं। जानें इस गिरफ्तारी के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
 

प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नजदीक प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ED ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की चुनावी रणनीति बनाने वाली संस्था I-PAC के सह-संस्थापक और निदेशक विनेश चंदेल को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी 13 अप्रैल को दिल्ली में हुई, जिसने बंगाल की राजनीतिक स्थिति में हलचल मचा दी है। चंदेल पर कोयला घोटाले से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने का गंभीर आरोप लगाया गया है।


 


इस गिरफ्तारी के चलते चुनावी माहौल में TMC के प्रचार अभियान को बड़ा झटका लग सकता है। विनेश चंदेल को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत हिरासत में लिया गया है। यह कार्रवाई उस समय की गई है जब बंगाल में मतदान की तैयारियां अंतिम चरण में हैं, जिसमें दो चरण (23 और 29 अप्रैल) के मतदान शामिल हैं।


 



गिरफ्तारी का कारण


ED की जांच में यह सामने आया है कि आसनसोल क्षेत्र में ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की खदानों से कोयला तस्करी का पैसा अवैध तरीकों से I-PAC तक पहुंचा। जांच एजेंसी का आरोप है कि लगभग 20 करोड़ रुपये की काली कमाई को 'हवाला' ऑपरेटर्स और मुंबई की एक 'अंगड़िया' फर्म के माध्यम से I-PAC के खातों में डाला गया। यह मामला 2020 में CBI द्वारा दर्ज FIR पर आधारित है, जिसमें अब राजनीतिक रणनीतिकारों का नाम जुड़ता दिख रहा है।


 


विनेश चंदेल की गिरफ्तारी अचानक नहीं हुई है, बल्कि ED लंबे समय से इस सिंडिकेट पर नजर रख रही थी। इस साल 8 जनवरी को कोलकाता स्थित I-PAC कार्यालय पर छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वहां पहुंच गई थीं, जिससे बड़ा प्रशासनिक विवाद उत्पन्न हुआ था। इसके बाद 2 अप्रैल को दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई में कई अधिकारियों के ठिकानों पर भी छापे मारे गए थे। अब गिरफ्तारी के बाद ED यह जानने की कोशिश करेगी कि क्या घोटाले का पैसा चुनाव प्रचार में इस्तेमाल किया गया है।


 


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