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पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में बीजेपी की चुनावी रणनीतियाँ

पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में 2026 के विधानसभा चुनावों के पहले चरण की वोटिंग संपन्न हो चुकी है। दोनों राज्यों में बीजेपी ने आक्रामक रणनीति अपनाई है, जिसमें भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और धार्मिक मुद्दों को प्रमुखता दी गई है। जानें कि बीजेपी ने किस प्रकार से सत्तारूढ़ दलों के खिलाफ अपनी स्थिति मजबूत की है और किन मुद्दों को उठाया है।
 

पहले चरण की वोटिंग का परिणाम

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण की मतदान प्रक्रिया 23 अप्रैल को संपन्न हुई। इसी दिन तमिलनाडु में भी एक चरण में मतदान हुआ। हालांकि, बंगाल में दूसरे चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को निर्धारित है। 23 अप्रैल को हुई वोटिंग में दोनों राज्यों के नागरिकों ने बड़े उत्साह के साथ मतदान किया। तमिलनाडु में 85.14 प्रतिशत मतदान हुआ, जो कि अब तक का सबसे उच्चतम आंकड़ा है। इसी प्रकार, बंगाल में पहले चरण के मतदान में 92.56 प्रतिशत वोटिंग हुई, जो कि ऐतिहासिक रूप से सबसे अधिक है। इन दोनों राज्यों में बीजेपी का मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ दलों से है।


बीजेपी की रणनीति

पश्चिम बंगाल में बीजेपी तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ सीधे तौर पर चुनावी मैदान में उतरी है। पार्टी को इस राज्य से काफी उम्मीदें हैं। वहीं, तमिलनाडु में बीजेपी अपनी सहयोगी AIADMK के साथ मिलकर एनडीए के बैनर तले चुनाव लड़ रही है। दोनों राज्यों में बीजेपी ने आक्रामक रणनीति अपनाई है और जनता के बीच वोट मांगने के लिए सक्रियता दिखाई है।


पश्चिम बंगाल में उठाए गए मुद्दे

पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने ममता बनर्जी की सरकार के पिछले 15 वर्षों के शासन में भ्रष्टाचार के आरोपों को प्रमुखता दी है। पार्टी के केंद्रीय और राज्य स्तर के नेता जनता के बीच यह आरोप दोहरा रहे हैं, जिससे टीएमसी की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके। बीजेपी ने शिक्षक भर्ती घोटाला, कोयला घोटाला और पशु तस्करी जैसे मामलों को प्रमुख मुद्दा बनाया है। इसके अलावा, पार्टी ने टीएमसी सरकार पर कानून-व्यवस्था, चुनावी हिंसा और राजनीतिक हत्याओं के आरोप भी लगाए हैं।


तमिलनाडु में उठाए गए मुद्दे

तमिलनाडु में बीजेपी की चुनावी गतिविधियाँ बंगाल की तुलना में कम तेज हैं। यहाँ पार्टी सॉफ्ट हिंदुत्व, भ्रष्टाचार, तमिल पहचान और विकास जैसे मुद्दों को उठाने में लगी है। बीजेपी लगातार डीएमके और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन पर परिवारवाद और भ्रष्टाचार के आरोप लगा रही है। इसके अलावा, पार्टी के नेता हिंदू धार्मिक मुद्दों को भी उठा रहे हैं, जैसे मंदिरों के प्रबंधन में हस्तक्षेप। बीजेपी ने इस बार तमिल अस्मिता के साथ राष्ट्रवाद को भी अपने मुद्दों में शामिल किया है।