असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा की पवन खेड़ा के खिलाफ नाराजगी और चुनावी रणनीति
मुख्यमंत्री की नाराजगी
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने गुवाहाटी के पुलिस कमिश्नर के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त की है, खासकर कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा के खिलाफ दर्ज मानहानि मामले को लेकर। उन्होंने कहा है कि यदि उनकी पार्टी 4 मई को विधानसभा चुनावों में जीतती है, तो 5 मई को वह पुलिस कमिश्नर डॉ. पार्थ सारथी महंत को अपने रडार पर लेंगे।
पवन खेड़ा पर आरोप
सीएम सरमा ने पवन खेड़ा पर आरोप लगाया है कि वह केवल एक राज्य सभा सीट की लालच में ऐसे गंभीर आरोप लगा रहे हैं, जो निराधार हैं। उनकी नाराजगी इतनी बढ़ गई है कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से कई बार पवन खेड़ा के खिलाफ असंसदीय भाषा का प्रयोग किया है, जिसके लिए उनकी आलोचना भी हुई है।
गुवाहाटी पुलिस कमिश्नर से नाराजगी का कारण
एक इंटरव्यू में, हिमंता बिस्व सरमा ने कहा, 'यह व्यक्ति गुवाहाटी से दिल्ली कैसे पहुंचा? यदि हमारी सरकार 4 मई को आती है, तो 5 मई को पुलिस कमिश्नर मेरी फायरिंग लाइन में होंगे।' उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस कमिश्नर को गुवाहाटी से हटाया जाएगा।
पुलिस की कार्रवाई पर सवाल
हिमंता बिस्व सरमा, मुख्यमंत्री, असम:-
12 बजे पुलिस ने केस दर्ज किया और 6 बजे पवन खेड़ा चले गए। इसका मतलब है कि असम पुलिस ने उन्हें जाने दिया। चुनाव के बाद, मैं एक जनहित याचिका दायर करूंगा, जो चुनाव आयोग के खिलाफ होगी।
घुसपैठियों के खिलाफ असम सरकार की रणनीति
मुख्यमंत्री ने कहा कि बांग्लादेश से घुसपैठियों को बाहर करने के लिए जवान अंधेरे का इंतजार करते हैं, क्योंकि बांग्लादेश के साथ कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं है। जैसे ही मौका मिलता है, वे उन्हें वापस धकेल देते हैं।
बांग्लादेश के साथ रिश्तों पर मुख्यमंत्री का दृष्टिकोण
हिमंता बिस्व सरमा ने कहा कि असम के लोग चाहते हैं कि भारत और बांग्लादेश के रिश्ते खराब रहें। उन्होंने कहा, 'हम भगवान से प्रार्थना करते हैं कि बांग्लादेश के साथ भारत के रिश्ते बेहतर न हों।' यह बयान असम के लिए खतरे की घंटी हो सकता है।
घुसपैठ पर मुख्यमंत्री का विचार
मुख्यमंत्री ने कहा, 'जब तक पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार नहीं बनती, असम में चिल्लाते रहिए। फिर जो होगा, वह मीडिया कवरेज के लिए होगा। देश की सुरक्षा के लिए जरूरी है कि असम में बीजेपी की सरकार बने।'
हिमंता का रवैया और पार्टी पर प्रभाव
हिमंता बिस्व सरमा ने इस इंटरव्यू में कई ऐसे बयान दिए हैं, जो उनकी और बीजेपी की छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं। जिस चुनाव आयोग का बीजेपी बार-बार बचाव करती है, उसी के खिलाफ जनहित याचिका दायर करने की योजना बना रहे हैं।