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कोलकाता के डॉक्टर ने 'जय श्री राम' नारे पर दी छूट, विवाद बढ़ा

कोलकाता के एक प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ ने 'जय श्री राम' का नारा लगाने वाले मरीजों को कंसल्टेशन फीस में छूट देने का अनोखा प्रस्ताव रखा है। इस कदम ने विवाद को जन्म दिया है, क्योंकि डॉक्टर ने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा का भी खुलासा किया है। तृणमूल कांग्रेस ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिससे धर्म, राजनीति और चिकित्सा नैतिकता के बीच एक नई बहस शुरू हो गई है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और डॉक्टर की पृष्ठभूमि।
 

कोलकाता में डॉक्टर का अनोखा प्रस्ताव

कोलकाता, पश्चिम बंगाल में एक चिकित्सक का मरीजों को इलाज में छूट देने का अनोखा तरीका चर्चा का विषय बन गया है। प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रकाश कुमार हाजरा ने घोषणा की है कि जो भी मरीज उनके क्लीनिक में 'जय श्री राम' का नारा लगाएगा, उसे कंसल्टेशन फीस में 500 रुपये की छूट मिलेगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार को तीन मरीजों ने इस ऑफर का लाभ उठाया।


राजनीतिक महत्वाकांक्षा का खुलासा

डॉ. हाजरा ने इस कदम के पीछे अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को स्पष्ट किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक पोस्ट में बताया कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) से प्रेरित हैं। उनका कहना है कि 'जय श्री राम' अब केवल एक धार्मिक नारा नहीं, बल्कि एक राजनीतिक नारा बन चुका है। हालांकि, इस तरह के कदम पर नागरिक समाज और विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं।


डॉक्टर का तर्क

अपने निर्णय का बचाव करते हुए, डॉ. हाजरा ने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी राजनीतिक सोच रखने का अधिकार है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. बिधान चंद्र रॉय का उदाहरण देते हुए कहा कि डॉक्टर होने के साथ राजनीति में सक्रिय होना गलत नहीं है। उनका उद्देश्य जरूरतमंद मरीजों को राहत देना है।


भविष्य की योजनाएं

डॉ. हाजरा ने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य केवल छूट देना नहीं, बल्कि राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना भी है। उन्होंने कहा, 'मैं आगामी चुनाव में BJP के उम्मीदवार के रूप में उतरना चाहता हूं। इस डिस्काउंट के माध्यम से मेरा मकसद जरूरतमंदों को राहत देना और लोगों को BJP के पक्ष में एकजुट करना है।' यह विशेष छूट केवल उनके निजी क्लीनिक पर लागू है।


TMC की प्रतिक्रिया

डॉक्टर के इस प्रस्ताव पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पूर्व TMC सांसद शांतनु सेन ने इसे चिकित्सा पेशे की गरिमा के खिलाफ बताया और कहा कि हर डॉक्टर को बिना भेदभाव के इलाज करने की शपथ दिलाई जाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि धार्मिक नारे के आधार पर रियायत देना नैतिकता के खिलाफ है। इस मामले ने कोलकाता में धर्म, राजनीति और चिकित्सा नैतिकता के बीच एक नई बहस को जन्म दिया है।


डॉ. हाजरा की पृष्ठभूमि

डॉ. हाजरा कलकत्ता मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल के पूर्व छात्र हैं और पिछले 30 वर्षों से प्रैक्टिस कर रहे हैं। वह मणिपाल हॉस्पिटल में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी के डायरेक्टर भी हैं। उन्होंने बताया कि उनका ऑफर केवल उनके प्राइवेट क्लिनिक में आने वाले मरीजों के लिए है। उनके अनुभव में 10,000 से अधिक रेडियल एंजियोग्राफी और 2,500 से अधिक कोरोनरी एंजियोप्लास्टी शामिल हैं। पहले वह 2,000 रुपये कंसल्टेशन फीस लेते थे, लेकिन अब इसे घटाकर 1,500 रुपये कर दिया है।