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सरकार ने पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर आयात शुल्क में की कटौती

भारत सरकार ने पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर आयात शुल्क में कटौती का निर्णय लिया है, जिसका उद्देश्य घरेलू उद्योग को राहत प्रदान करना है। यह कदम वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं के बीच उठाया गया है। वित्त मंत्रालय ने 41 आवश्यक पेट्रोकेमिकल वस्तुओं पर कस्टम ड्यूटी को समाप्त कर दिया है, जिससे विभिन्न मैन्युफैक्चरिंग सेक्टरों को लाभ होगा। जानें इस निर्णय के पीछे के कारण और इससे आम जनता को कैसे राहत मिलेगी।
 

आयात शुल्क में कटौती का निर्णय


मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित हुई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही रुकने से कच्चे तेल की कीमतें 122 डॉलर प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर तक पहुँच गई हैं। इस स्थिति के कारण कई देशों में पेट्रोल और एलपीजी की कमी हो गई है।

लागत में वृद्धि के चलते निजी कंपनियों ने तेल की कीमतों में इजाफा किया है। कच्चे तेल की महंगाई ने तेल कंपनियों की लागत को बढ़ा दिया है। सरकार ने इस बोझ को आम जनता पर नहीं पड़ने देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। इसके साथ ही, पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर आयात शुल्क में भी कमी की गई है।

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, 41 आवश्यक पेट्रोकेमिकल वस्तुओं पर कस्टम ड्यूटी को पूरी तरह से हटा दिया गया है। यह छूट 2 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक लागू रहेगी। सरकार का यह कदम घरेलू उद्योग के लिए आवश्यक कच्चे माल की उपलब्धता को सुनिश्चित करना है। इस निर्णय से प्लास्टिक, पैकेजिंग, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल, केमिकल, ऑटोमोटिव पार्ट्स और अन्य मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को लाभ होगा।

ग्लोबल सप्लाई चेन पर प्रभाव
वित्त मंत्रालय ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक सप्लाई चेन पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। इसी कारण सरकार ने आवश्यक पेट्रोकेमिकल इनपुट्स पर कस्टम ड्यूटी को पूरी तरह से खत्म करने का निर्णय लिया है।

कस्टम ड्यूटी से मुक्त की गई वस्तुएं
सरकार ने जिन 40 वस्तुओं को कस्टम ड्यूटी से मुक्त किया है, उनमें मेथेनॉल, टोल्यून, स्टाइरीन, विनाइल क्लोराइड मोनोमर, मोनोएथिलीन ग्लाइकॉल (MEG), फिनॉल, एसिटिक एसिड, प्यूरिफाइड टेरेफ्थैलिक एसिड (PTA), पॉलीइथिलीन, पॉलीप्रोपीलीन, पॉलीस्टाइरीन, पॉलीविनाइल क्लोराइड (PVC), पॉलीइथिलीन टेरेफ्थालेट (PET), और इंजीनियरिंग प्लास्टिक जैसे एक्रिलोनाइट्राइल-ब्यूटाडीन-स्टाइरीन (ABS) शामिल हैं। इन सभी उत्पादों को 30 जून तक बिना कस्टम ड्यूटी के आयात किया जा सकेगा।

इन वस्तुओं का उपयोग
मेथेनॉल का उपयोग प्लाईवुड, इंसुलेशन फोम, एसिटिक एसिड, प्लास्टिक, सिंथेटिक फाइबर, पेंट, कोटिंग्स और दवाओं के निर्माण में होता है। टोल्यून का उपयोग पेंट, थिनर, गोंद, प्रिंटिंग इंक, पेंट रिमूवर, रबर, रेजिन और प्लास्टिक बनाने में किया जाता है। पॉलीस्टाइरीन से डिस्पोजेबल प्लेट, कप, फूड कंटेनर, एग ट्रे और आइसक्रीम कप बनाए जाते हैं।

सरकार का निर्णय क्यों?
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण शिपिंग रूट्स पर असर पड़ा है, जिससे फर्टिलाइजर, कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के आयात को लेकर चिंता बढ़ी है। भारत इन चीजों की जरूरत के लिए 85 प्रतिशत आयात पर निर्भर है। अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी 2026 को ईरान पर हमला किया, जिसके बाद ईरान की प्रतिक्रिया से संघर्ष बढ़ गया और कच्चे तेल की कीमतें 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ गईं। जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से शिपिंग लागत में वृद्धि हुई है।

डीजल और ATF पर एक्सपोर्ट ड्यूटी
सरकार ने पिछले हफ्ते पेट्रोल और डीजल पर लगाई जाने वाली एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी। इसके अलावा, डीजल पर 21.50 रुपये प्रति लीटर और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर 29.50 रुपये प्रति लीटर की एक्सपोर्ट ड्यूटी लगा दी गई है। वर्तमान में पेट्रोल पर 3 रुपये प्रति लीटर की एक्साइज ड्यूटी है, जबकि डीजल पर कोई एक्साइज ड्यूटी नहीं है। इस छूट से पेट्रोकेमिकल उद्योग को तत्काल राहत मिलेगी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की लागत को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी.