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लखनऊ के लिए महत्वाकांक्षी सर्कुलर एक्सप्रेसवे परियोजना का आगाज़

लखनऊ में सर्कुलर एक्सप्रेसवे परियोजना का उद्देश्य यातायात के दबाव को कम करना और क्षेत्र को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। यह 6 लेन का एक्सप्रेसवे लखनऊ को आसपास के जिलों से जोड़ेगा, जिससे नई औद्योगिक क्लस्टर और रोजगार के अवसर पैदा होंगे। परियोजना को दो चरणों में पूरा किया जाएगा, जिसमें पहले चरण की लागत 2,100 करोड़ रुपये और दूसरे चरण की लागत 3,900 करोड़ रुपये है।
 

लखनऊ में सर्कुलर एक्सप्रेसवे का महत्व

लखनऊ समाचार: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लिए बनाई जा रही महत्वाकांक्षी राज्य राजधानी माला परियोजना अब यूपी स्टेट कैपिटल रीजन की प्रमुख योजनाओं में शामिल हो गई है। यह 6 लेन का सर्कुलर एक्सप्रेसवे लखनऊ को बाराबंकी, उन्नाव, रायबरेली, हरदोई और सीतापुर से जोड़ते हुए पूरे क्षेत्र को एक महत्वपूर्ण आर्थिक इकाई में परिवर्तित करेगा। इस परियोजना का विकास ब्राउनफील्ड मॉडल पर किया जाएगा, जिसका अर्थ है कि मौजूदा सड़कों को चौड़ा करके और आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करके एक्सप्रेसवे का निर्माण किया जाएगा। इससे नई भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता कम होगी और परियोजना तेजी से पूरी हो सकेगी।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य लखनऊ और उसके आसपास के जिलों में बढ़ते यातायात के दबाव को कम करना है। वर्तमान में, आसपास के जिलों से आने वाले भारी वाहन सीधे लखनऊ शहर से गुजरते हैं, जिससे प्रमुख मार्गों पर लगातार जाम की स्थिति बनी रहती है। सर्कुलर एक्सप्रेसवे के निर्माण के बाद क्षेत्रीय यातायात को वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा। विस्तृत ट्रैफिक अध्ययन में बाराबंकी-लखनऊ मार्ग पर सबसे अधिक यातायात पाया गया है।

प्रमुख ट्रैफिक आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • लखनऊ-बाराबंकी: 50,000 वाहन
  • लखनऊ-उन्नाव: 40,000 वाहन
  • लखनऊ-संडीला: 40,000 वाहन
  • उन्नाव-रायबरेली: 35,000 वाहन
  • सीतापुर-हरदोई: 33,000 वाहन
  • रायबरेली-बाराबंकी: 23,000 वाहन

परियोजना के चरण

इस परियोजना को दो चरणों में पूरा करने की योजना है। पहले चरण में लालगंज-रायबरेली-हैदरगढ़-बाराबंकी को जोड़ा जाएगा, जिसे 5 वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य है। इसकी अनुमानित लागत 2,100 करोड़ रुपये है। दूसरे चरण में बाराबंकी-बिसवां-सीतापुर-हरदोई-संडीला को जोड़ा जाएगा, जिसे 10 वर्षों में विकसित किया जाएगा। इसकी अनुमानित लागत 3,900 करोड़ रुपये है।

सड़क निर्माण के साथ-साथ एक्सप्रेसवे के किनारे नए औद्योगिक क्लस्टर, लॉजिस्टिक पार्क, वेयरहाउस और आवासीय परियोजनाएं विकसित की जाएंगी। बेहतर कनेक्टिविटी से निवेश आकर्षित होगा और स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। आज मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक होने वाली है, जिसमें सभी संबंधित विभागों के प्रमुख सचिव शामिल होंगे। इस बैठक में इस परियोजना समेत अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं को मंजूरी मिलने की उम्मीद है। राज्य राजधानी माला परियोजना लखनऊ को ट्रैफिक के बोझ से मुक्ति दिलाते हुए पूरे क्षेत्र को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगी.