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महंगाई का नया दौर: खाद्य और उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें बढ़ने की संभावना

महंगाई के नए दौर में खाद्य और उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि की संभावना बढ़ गई है। वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते बिस्किट, साबुन, और खाने के तेल जैसी वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं। FMCG और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कंपनियां मूल्य वृद्धि पर विचार कर रही हैं। जानें इस स्थिति का आपके बजट पर क्या असर पड़ेगा और कंपनियां किस तरह से इस चुनौती का सामना कर रही हैं।
 

महंगाई का असर


नई दिल्ली: वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का प्रभाव अब सीधे आपके बजट पर पड़ने वाला है। बिस्किट, साबुन, खाने का तेल और घरों में उपयोग होने वाले पेंट जैसी वस्तुओं की कीमतें बढ़ने की संभावना है। विशेष रूप से पैकेजिंग और पेट्रोलियम से संबंधित उत्पादों की कीमतों में वृद्धि के कारण FMCG (रोजमर्रा के उपयोग का सामान) और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (जैसे टीवी और फ्रिज) बनाने वाली कंपनियां मूल्य वृद्धि पर विचार कर रही हैं।

सूत्रों के अनुसार, 'लाहोरी जीरा' जैसी कंपनियों ने पहले ही कुछ उत्पादों की कीमतें बढ़ा दी हैं। 'नुवामा इक्विटीज' की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि खाने के तेल की कंपनियों ने कीमतों में 4-5 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की है। इसके अलावा, पाम ऑयल की बढ़ती कीमतों के कारण बीकाजी, ब्रिटानिया और नेस्ले जैसी खाद्य कंपनियां भी इस तिमाही में दाम बढ़ा सकती हैं।

पिछले कुछ वर्षों में पाम ऑयल की कीमतें कच्चे तेल के साथ उतार-चढ़ाव करती रही हैं। पाम ऑयल की महंगाई से HUL और गोदरेज जैसी साबुन निर्माताओं की चुनौतियाँ भी बढ़ सकती हैं, क्योंकि यह उनके लिए एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है।

दामों में समायोजन की तैयारी
Zydus Wellness के सीईओ तरुण अरोड़ा ने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव की अवधि जितनी लंबी होगी, उतनी ही अधिक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि की संभावना है। उन्होंने बताया कि कंपनियां इस स्थिति से निपटने के लिए छोटे पैकेटों का वजन कम कर सकती हैं, जिससे कीमतें स्थिर रहेंगी लेकिन सामग्री की मात्रा कम हो जाएगी। वहीं, बड़े पैकेटों की कीमतें सीधे बढ़ाई जा सकती हैं।

महंगाई का प्रभाव
ईरान युद्ध का प्रभाव अब आपकी जेब पर पड़ने वाला है। बिस्किट, साबुन, तेल और पेंट जैसी वस्तुओं की कीमतें बढ़ने की संभावना है। FMCG और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कंपनियां मूल्य वृद्धि की तैयारी में हैं। खाने के तेल की कीमत में 4-5 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हो चुकी है। बीकाजी, ब्रिटानिया और नेस्ले इस तिमाही में दाम बढ़ा सकती हैं। HUL और गोदरेज भी साबुन की कीमतों में वृद्धि की योजना बना रही हैं।

गैस आधारित प्लांट की स्थिति
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कई पैक्ड फूड कंपनियों ने उन प्लांटों में उत्पादन रोक दिया है या कम कर दिया है जो एलपीजी पर निर्भर हैं।

पेंट उद्योग पर प्रभाव
पेंट उद्योग में उपयोग होने वाला लगभग 40% कच्चा माल कच्चे तेल से संबंधित है, इसलिए क्रूड की बढ़ती कीमतों का असर यहाँ भी दिखाई देने लगा है। बर्जर पेंट्स, कंसाई नेरोलैक और JSW डुलक्स ने पिछले महीने ही कीमतें बढ़ा दी हैं। एशियन पेंट्स भी आने वाले दिनों में 6-8% तक दाम बढ़ा सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) में कंपनियों के मुनाफे पर दबाव देखने को मिल सकता है।