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भारतीय शेयर बाजार में सुधार के संकेत: RBI और GDP आंकड़ों का प्रभाव

शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार ने सकारात्मक संकेत दिखाए, जब RBI ने विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इसके साथ ही, GDP वृद्धि दर के आंकड़े भी उम्मीद से बेहतर रहे। क्या ये संकेत बाजार में सुधार लाएंगे? जानें इस लेख में RBI के निर्णयों और GDP के आंकड़ों का बाजार पर प्रभाव।
 

शुक्रवार का दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक

भारतीय शेयर बाजार के लिए शुक्रवार का दिन काफी अच्छा रहा। सुबह RBI ने विदेशी निवेश को बढ़ावा देने और विदेशी मुद्रा की उपलब्धता को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। वहीं, शाम को GDP वृद्धि दर के आंकड़े भी उम्मीद से बेहतर आए। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या इन संकेतों से बाजार में सुधार देखने को मिलेगा?


RBI के निर्णय और GDP के आंकड़े

RBI ने रेपो रेट को 5.25% पर बनाए रखा है और मौद्रिक नीति का रुख न्यूट्रल रखा है। इस बार RBI का ध्यान विदेशी निवेश को बढ़ावा देने पर केंद्रित रहा। इसके तहत केंद्रीय बैंक ने विदेशी निवेशकों और प्रवासी भारतीयों के लिए 7 महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं।



  • सरकारी सिक्योरिटीज में FII निवेश पर 1 अप्रैल 2026 से लॉन्गटर्म कैपिटल गेन टैक्स समाप्त किया जाएगा।

  • 15, 30 और 40 साल की नई सरकारी सिक्योरिटीज को Fully Accessible Route में शामिल किया गया है।

  • जनरल रूट के तहत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों पर लगी कंसंट्रेशन लिमिट हटा दी गई है।

  • NRIs और OCIs को बिना SEBI रजिस्ट्रेशन के लिस्टेड शेयरों में अधिक निवेश की अनुमति दी गई है।

  • PSU के ECB कर्ज के लिए रियायती फॉरेक्स स्वैप विंडो 30 सितंबर 2026 तक बढ़ाई गई है।

  • FCNR डिपॉजिट जुटाने पर बैंकों को मिलने वाला हेजिंग कॉस्ट सपोर्ट भी 30 सितंबर 2026 तक जारी रहेगा।

  • एक्सपोर्ट से होने वाली कमाई को भारत लाने की समयसीमा 15 महीने से घटाकर 9 महीने कर दी गई है।


इन कदमों का उद्देश्य विदेशी पूंजी को आकर्षित करना और भारतीय वित्तीय बाजारों को मजबूत बनाना है।


GDP के आंकड़े

भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 में मजबूत वृद्धि दर्ज की है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, देश की GDP वृद्धि दर 7.7% हो गई, जो पिछले वित्त वर्ष में 7.1% थी। यह आंकड़े अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत देते हैं।


बाजार पर प्रभाव

1. शेयर बाजार


5 जून को भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बाद मामूली गिरावट आई। निवेशकों की नजर RBI की मौद्रिक नीति पर थी, जिसके चलते बाजार में सीमित प्रतिक्रिया देखने को मिली। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 116.67 अंक यानी 0.16% गिरकर 74,243.34 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 49.85 अंक यानी 0.21% की गिरावट के साथ 23,366.70 पर पहुंच गया।


2. रुपया मजबूत हुआ


भारतीय रुपये ने शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले मजबूती दिखाई। RBI की मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद रुपया 56 पैसे बढ़कर 95.18 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए केंद्रीय बैंक द्वारा उठाए गए कदमों से निवेशकों का विश्वास बढ़ा है।


महंगाई का प्रभाव

विशेषज्ञों का कहना है कि मौद्रिक नीति का परिणाम उम्मीद के अनुसार रहा। RBI गवर्नर द्वारा घोषित उपायों से रुपये को मजबूती मिली। हालांकि, ग्रोथ के अनुमानों में कटौती और महंगाई के कारण निवेशकों ने मुनाफा वसूली की। लेकिन करेंसी में आई तेजी से बाजार का सेंटिमेंट बेहतर हो सकता है।


भविष्य की संभावनाएं

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि बेहतर GDP आंकड़े और RBI का विकास समर्थक रुख भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हैं। यदि महंगाई नियंत्रण में रहती है, तो आने वाले महीनों में शेयर बाजार में तेजी देखने को मिल सकती है।