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भारतीय थाली: महंगाई का सच्चा मापदंड

भारतीय थाली अब महंगाई का एक महत्वपूर्ण संकेतक बन गई है। जून 2026 में शाकाहारी और मांसाहारी थालियों की कीमतों में वृद्धि हुई है, जिसका मुख्य कारण वैश्विक संघर्ष और स्थानीय जलवायु परिवर्तन है। जानें कैसे ये कारक भारतीय परिवारों के बजट को प्रभावित कर रहे हैं और भविष्य में कीमतों में क्या बदलाव आ सकते हैं।
 

महंगाई का नया संकेतक


भारतीय थाली अब देश में महंगाई का एक सच्चा मापदंड बन गई है। जून 2026 में, घर पर बने शाकाहारी थाली की कीमत 28.4 रुपये हो गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5 प्रतिशत अधिक है। वहीं, मांसाहारी थाली की कीमत 58.2 रुपये तक पहुंच गई, जो 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। महीने दर महीने, दोनों थालियों की कीमतों में क्रमशः 4 प्रतिशत और 3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ये आंकड़े भले ही छोटे लगें, लेकिन ये महत्वपूर्ण हैं। CRISIL का यह सूचकांक यह दर्शाता है कि एक परिवार को एक भोजन बनाने में कितना खर्च आता है, जिसमें रोटी, चावल, दाल, सब्जियाँ, दही और सलाद शामिल हैं।


इस महंगाई के पीछे दो मुख्य कारण हैं: एक तो ईरान-अमेरिका संघर्ष जो लगभग 3000 किलोमीटर दूर है, और दूसरा, हमारे अपने क्षेत्र में गर्मी की लहर। सब्जियों की कीमतों में वृद्धि का मुख्य कारण टमाटर है, जिसकी कीमत जून में 42 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 31 प्रतिशत अधिक है। इसके अलावा, रसोई के तेल और गैस की कीमतों में भी वृद्धि हुई है, जो पश्चिम एशिया के संघर्ष से प्रभावित हैं।


मांसाहारी थाली की कीमतों में तेजी

मांसाहारी थाली की कीमतें शाकाहारी थाली की तुलना में तेजी से बढ़ी हैं, जिसका मुख्य कारण ब्रोइलर चिकन है। CRISIL के अनुसार, ब्रोइलर की कीमतों में लगभग 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। गर्मी के कारण पक्षियों की मृत्यु दर बढ़ गई, जिससे आपूर्ति में कमी आई और कीमतें बढ़ गईं।



CRISIL के निदेशक पुषान शर्मा ने बताया कि भारतीय परिवारों के बजट पर यह एक दोहरी मार है। पिछले वर्ष में, घर पर बने भोजन की लागत बढ़ गई है, जिसमें शाकाहारी थाली की कीमत 5% और मांसाहारी थाली की कीमत 6% बढ़ी है।


मानसून का प्रभाव

अगर कोई उम्मीद कर रहा है कि थाली की कीमतें जल्द ही कम होंगी, तो CRISIL का कहना है कि यह बारिश पर निर्भर करेगा। जून 1 से जुलाई 7 के बीच वर्षा औसत से 17 प्रतिशत कम रही। मानसून की स्थिति और फसल की संभावनाएं इस पर निर्भर करेंगी।


  • प्याज: मध्यम अवधि में कीमतें स्थिर रहने की संभावना है।
  • आलू: धीरे-धीरे बढ़ सकता है।
  • टमाटर: जुलाई और अगस्त में स्थिर रहने की संभावना है।
  • दालें: उरद और मूंग की कीमतें स्थिर रह सकती हैं।


इसका मतलब यह है कि भारतीय परिवारों का खाद्य बिल अब केवल मंडी में नहीं, बल्कि मानसून चार्ट और मध्य पूर्व में भी लिखा जा रहा है।