भारत सरकार की काले धन के खिलाफ सख्त कार्रवाई: पनामा पेपर्स का बड़ा योगदान
काले धन के खिलाफ सरकार की कार्रवाई
भारत सरकार ने काले धन के खिलाफ अपनी मुहिम को और तेज करते हुए महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। 'ब्लैक मनी (अघोषित विदेशी आय और संपत्ति) तथा कर अधिरोपण अधिनियम' के तहत, 31 दिसंबर 2025 तक, सरकार ने 41,257 करोड़ रुपये का टैक्स और जुर्माना वसूला है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रक्रिया में लगभग 33 प्रतिशत मामले पनामा पेपर्स से जुड़े हुए हैं, जो यह दर्शाता है कि विदेशों में छिपी संपत्तियों और अघोषित आय का पता लगाने में पनामा पेपर्स ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आपको याद दिला दें कि पनामा पेपर्स की जांच 2016 में 100 से अधिक मीडिया संस्थानों द्वारा की गई थी।
सरकार का कहना है कि काले धन के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। इसका उद्देश्य टैक्स चोरी को रोकना और वित्तीय पारदर्शिता को बढ़ावा देना है, ताकि अर्थव्यवस्था को और अधिक साफ-सुथरा बनाया जा सके। 2016 में, दुनिया भर के 100 से अधिक मीडिया संस्थानों ने एक ऐसी जांच की, जिसने वैश्विक वित्तीय प्रणाली की परतें खोल दीं। इस बड़े खुलासे में भारतीय मीडिया भी शामिल था, जिसमें लगभग 370 पत्रकारों की टीम ने 1.15 करोड़ गोपनीय दस्तावेजों की गहन जांच की।
खुलासे ने सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल उठाए
इन दस्तावेजों का संबंध पनामा की प्रसिद्ध लॉ फर्म मोसैक फोन्सेका से था। जांच में यह सामने आया कि कई अमीर और प्रभावशाली व्यक्तियों ने टैक्स बचाने के लिए विदेशों में शेल कंपनियां स्थापित की थीं। इन कंपनियों का उपयोग संपत्तियों को छिपाने और वित्तीय लेन-देन को गोपनीय रखने के लिए किया जाता था। इस खुलासे ने न केवल कई प्रमुख नामों को कटघरे में खड़ा किया, बल्कि टैक्स चोरी और वित्तीय पारदर्शिता पर वैश्विक बहस को भी तेज कर दिया। पनामा पेपर्स के खुलासे के बाद भारतीय राजनीति में हलचल मच गई थी।
देशभर में दर्ज किए गए मामले
इन खुलासों के बाद देशभर में 426 मामले दर्ज किए गए और लगभग 13,800 करोड़ रुपये की राशि टैक्स के दायरे में लाई गई। यह मामला इतना गंभीर था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। पनामा पेपर्स की जांच वैश्विक स्तर पर इतनी प्रभावशाली रही कि इसके परिणामस्वरूप आइसलैंड और पाकिस्तान जैसे देशों में सरकारें गिर गईं। यह खुलासा दुनिया भर में सत्ता और धन के संबंधों पर एक बड़ा झटका साबित हुआ।
सरकार ने किया 14,636 करोड़ की टैक्सेबल धनराशि का खुलासा
पनामा पेपर्स के खुलासे के बाद, भारतीय मीडिया ने अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर पैराडाइज पेपर्स और पैंडोरा पेपर्स की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2017 में पैराडाइज पेपर्स और 2021 में पैंडोरा पेपर्स की जांच में दुनियाभर के प्रभावशाली व्यक्तियों के वित्तीय लेन-देन पर सवाल उठाए गए। इन खुलासों का असर अब आंकड़ों में भी दिखने लगा है। 23 मार्च को लोकसभा में सरकार ने बताया कि इन तीनों बड़ी जांचों के चलते अब तक 14,636 करोड़ रुपये की राशि टैक्स के दायरे में लाई जा चुकी है।
काला धन के कानून के तहत 167 केस
पैराडाइज पेपर्स ने दुनिया भर में फैली ऑफशोर वित्तीय गतिविधियों की परतें खोलकर रख दी थीं। इस जांच में बरमूडा की प्रसिद्ध लॉ फर्म एप्पलबाय, सिंगापुर की एशियासिटी ट्रस्ट और 19 देशों की कंपनियों की रजिस्ट्रियों की जांच की गई। जांच का दायरा इतना बड़ा था कि लगभग 1.34 करोड़ कॉर्पोरेट रिकॉर्ड्स इसमें शामिल किए गए, जिससे वैश्विक वित्तीय नेटवर्क की जटिलता सामने आई। वहीं, पैंडोरा पेपर्स ने भी इसी तरह बड़े पैमाने पर खुलासे किए। इसमें 14 अंतरराष्ट्रीय कॉर्पोरेट सर्विस कंपनियों से जुड़े लगभग 1.19 करोड़ लीक दस्तावेजों की जांच की गई। इस पड़ताल में पता चला कि लगभग 29,000 कंपनियां और ट्रस्ट बनाए गए थे, जिनका उपयोग मुख्य रूप से टैक्स बचाने और संपत्ति छिपाने के लिए किया जा रहा था.