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भारत में सीएनजी की कीमतों में वृद्धि: महंगाई का नया झटका

भारत में सीएनजी की कीमतों में हाल ही में वृद्धि हुई है, जिससे महंगाई का एक नया झटका लगा है। 23 मई को सीएनजी की कीमत 1 रुपये प्रति किलो बढ़कर 81.09 रुपये हो गई है। यह पिछले 10 दिनों में ईंधन की कीमतों में तीसरी बार वृद्धि है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर आम आदमी के बजट पर पड़ेगा, खासकर उन लोगों पर जो रोजाना यात्रा करते हैं। जानें इस बढ़ोतरी के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
 

सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी

भारत में महंगाई के चलते एक और झटका लगा है, जब सीएनजी की कीमतों में वृद्धि हुई है। 23 मई को पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने के बाद, सीएनजी की कीमत भी 1 रुपये प्रति किलो बढ़ गई है। पहले, 22 मई को सीएनजी की कीमत 80.09 रुपये प्रति किलो थी, जो अब बढ़कर 81.09 रुपये प्रति किलो हो गई है। इस प्रकार, पिछले आठ दिनों में सीएनजी की कीमत में कुल 4 रुपये की वृद्धि हुई है.


ईंधन की कीमतों में हालिया बदलाव

देशभर में ईंधन की कीमतों में यह वृद्धि एक बार फिर से देखने को मिली है। हाल की बढ़ोतरी में पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 91 पैसे प्रति लीटर का इजाफा किया गया है। सीएनजी की कीमत में भी 1 रुपये प्रति किलो की वृद्धि हुई है।


पिछले 10 दिनों में कीमतों में वृद्धि

यह पिछले 10 दिनों में ईंधन की कीमतों में तीसरी बार वृद्धि है। 15 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी, और फिर 19 मई को भी कीमतों में 90 पैसे की वृद्धि हुई। इस प्रकार, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कुल मिलाकर लगभग 4.5 रुपये की वृद्धि हो चुकी है।


सीएनजी की कीमतों का प्रभाव

पश्चिम एशिया में चल रहे संकट का असर अब भारत में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। बढ़ती कीमतों का सीधा असर आम आदमी के बजट पर पड़ रहा है। जो लोग रोजाना कार, बाइक या ऑटो से यात्रा करते हैं, उनके खर्च में वृद्धि होगी। इसके अलावा, परिवहन लागत बढ़ने से खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है.


अंतरराष्ट्रीय बाजार का प्रभाव

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति का असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ता है। तेल कंपनियां इन कारकों के आधार पर समय-समय पर कीमतों में बदलाव करती हैं। ईरान में चल रहे संघर्ष के कारण भारत में ईंधन की आपूर्ति में बाधा बनी हुई है। सीएनजी की कीमतों में वृद्धि से विशेष रूप से टैक्सी, ऑटो और वाणिज्यिक वाहनों के चालकों पर प्रभाव पड़ेगा।