भारत में महंगाई का असर: स्ट्रीट फूड की कीमतों में वृद्धि
महंगाई का सीधा असर आम भारतीय पर
मिडिल ईस्ट में चल रहे संकट का प्रभाव अब सीधे भारतीयों की थाली पर दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण आवश्यक खाद्य पदार्थों की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। पहले जो महंगाई केवल बड़े बाजारों या पेट्रोल पंपों तक सीमित थी, वह अब छोटी दुकानों तक पहुंच गई है। चाय, चावल, समोसे, ब्रेड पकौड़े और लस्सी जैसी चीजों की उत्पादन लागत में वृद्धि हो रही है। इस बढ़ती महंगाई का असर देश के दो सबसे लोकप्रिय स्ट्रीट फूड पर भी पड़ा है।
मुंबई में पाव की कीमतों में वृद्धि
मुंबई, जो आर्थिक राजधानी है, में वड़ा पाव और पाव भाजी जैसे नाश्ते की कीमतों में वृद्धि हो रही है। स्थानीय बेकरियों में पाव की कीमत में लगभग एक रुपये की बढ़ोतरी हुई है। पहले 3 रुपये में मिलने वाला पाव अब 4 रुपये में बिक रहा है। थोक में खरीदने पर 12 पीस वाले पाव के पैकेट की कीमत में 10 रुपये की वृद्धि हुई है। इसका सीधा असर शहर के हजारों वड़ा पाव और पाव भाजी विक्रेताओं की लागत पर पड़ेगा, जिससे उपभोक्ताओं के लिए यह स्ट्रीट फूड महंगा हो जाएगा।
दिल्ली में छोले भटूरे की कीमतों में इजाफा
महंगाई का यह प्रभाव केवल मुंबई तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली में भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। पुरानी दिल्ली के पहाड़गंज में स्थित प्रसिद्ध 'सीताराम दीवान चंद' छोले भटूरे की दुकान पर भी कीमतें बढ़ गई हैं। यहां छोले भटूरे की एक प्लेट की कीमत 95 रुपये से बढ़कर 100 रुपये हो गई है। सिंगल भटूरा की कीमत भी 55 रुपये से बढ़कर 60 रुपये हो गई है।
दुकानदारों की मजबूरी
दुकानदारों के लिए कीमतें बढ़ाना अब मुनाफे की रणनीति नहीं, बल्कि एक आवश्यक कदम बन गया है। सीताराम छोले भटूरे के स्टाफ का कहना है कि कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि के कारण उनकी लागत बढ़ गई है। ईंधन की महंगाई के कारण कारोबार को सुचारू रूप से चलाने के लिए यह मामूली बढ़ोतरी जरूरी थी। हालांकि, ग्राहकों की संख्या पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है। ग्राहक यहां खास स्वाद के लिए आते हैं, इसलिए थोड़ी बढ़ी हुई कीमतें उनके लिए कोई बड़ी समस्या नहीं हैं।