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भारत में निजी निवेश में वृद्धि: FY26 में 56 लाख करोड़ रुपये का ऐलान

SBI रिसर्च की नई रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में निजी क्षेत्र के निवेश घोषणाएं 56 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई हैं। यह वृद्धि मैन्युफैक्चरिंग, पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में बड़े निवेश प्रस्तावों के कारण हुई है। रिपोर्ट में कुल निवेश घोषणाओं में लगातार वृद्धि, GDP आंकड़ों में सुधार और कंपनियों की उत्पादक संपत्तियों में बढ़ोतरी का भी उल्लेख किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रुझान भारत की दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है।
 

निजी क्षेत्र के निवेश में सकारात्मक बदलाव

भारत में निजी क्षेत्र के निवेश को लेकर लंबे समय से उठ रही चिंताओं के बीच SBI रिसर्च की नई रिपोर्ट ने एक सकारात्मक संकेत दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में प्राइवेट निवेश घोषणाएं बढ़कर 56 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई हैं, जो पिछले वित्त वर्ष के 37 लाख करोड़ रुपये से काफी अधिक है। रिपोर्ट में बताया गया है कि मैन्युफैक्चरिंग, पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में बड़े निवेश प्रस्तावों के कारण देश में कैपेक्स की गति तेज हुई है.


निवेश घोषणाओं में वृद्धि का संकेत

SBI रिसर्च की इकोव्रैप रिपोर्ट के अनुसार FY26 में निजी क्षेत्र द्वारा घोषित निवेश प्रस्ताव 56 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गए हैं। पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 37 लाख करोड़ रुपये था। निवेश घोषणाओं में यह वृद्धि दर्शाती है कि कंपनियां भविष्य की मांग और आर्थिक गतिविधियों के प्रति अधिक आशावादी हो रही हैं.


कुल निवेश घोषणाओं में लगातार वृद्धि

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कुल निवेश घोषणाओं का आंकड़ा पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है। FY19 में कुल निवेश घोषणाएं लगभग 17 लाख करोड़ रुपये थीं, जबकि FY26 में यह आंकड़ा बढ़कर 80 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह ट्रेंड उद्योग जगत के बढ़ते विश्वास और आर्थिक गतिविधियों में सुधार का संकेत देता है.


मैन्युफैक्चरिंग और पावर सेक्टर का योगदान

नए निवेश प्रस्तावों में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर सबसे बड़ा योगदानकर्ता बनकर उभरा है। FY26 की कुल निवेश घोषणाओं में इसकी हिस्सेदारी लगभग 28.9 प्रतिशत रही। इसके बाद पावर सेक्टर का योगदान 28.7 प्रतिशत और बिल्डिंग इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर का योगदान 23.1 प्रतिशत रहा। इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश भविष्य में रोजगार और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकता है.


GDP आंकड़ों से निवेश में वृद्धि का संकेत

रिपोर्ट में कहा गया है कि आधिकारिक GDP आंकड़े भी निवेश गतिविधियों में तेजी की पुष्टि करते हैं। विशेष रूप से FY26 की चौथी तिमाही में निवेश की गति काफी मजबूत रही। अर्थव्यवस्था में निवेश का प्रमुख संकेतक ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन (GFCF) में चौथी तिमाही के दौरान 10.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो मजबूत निवेश माहौल को दर्शाती है.


कंपनियों की उत्पादक संपत्तियों में वृद्धि

SBI रिसर्च ने निवेश के एक अन्य महत्वपूर्ण संकेतक ग्रॉस ब्लॉक में हुई बढ़ोतरी पर भी प्रकाश डाला है। रिपोर्ट के अनुसार, 5,000 से अधिक लिस्टेड भारतीय कंपनियों का कुल ग्रॉस ब्लॉक मार्च 2022 के 87 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर मार्च 2026 तक 145 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है.


आर्थिक विकास को मिलेगा समर्थन

विशेषज्ञों का मानना है कि निजी क्षेत्र का बढ़ता पूंजीगत खर्च भारत की दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। निवेश घोषणाओं में तेजी, उत्पादन क्षमता का विस्तार और लगातार बढ़ते कॉर्पोरेट एसेट्स यह संकेत देते हैं कि देश में निजी निवेश का नया चक्र मजबूत हो रहा है। आने वाले वर्षों में यह रुझान आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और औद्योगिक विस्तार को नई गति दे सकता है.