भारत में क्लीन एनर्जी के लिए नई सरकारी पहल: हाइड्रोजन और CNG पंपों की जांच होगी
सरकार का नया कदम क्लीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए
भारत सरकार ने क्लीन एनर्जी और ऊर्जा संक्रमण को प्रोत्साहित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब हाइड्रोजन, CNG, LPG और LNG ईंधन डिस्पेंसर की सरकारी जांच संभव होगी। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने लीगल मेट्रोलॉजी नियमों में संशोधन करते हुए सरकारी मंजूरशुदा टेस्टिंग सेंटर (GATCs) को इन फ्यूल पंपों की जांच करने की अनुमति दी है। इस निर्णय से ईंधन माप-तोल प्रणाली में सुधार होगा और उपभोक्ताओं को सही मात्रा में ईंधन प्राप्त करने में सहायता मिलेगी.
सरकार का मानना है कि भविष्य में देश में स्वच्छ ईंधन का उपयोग तेजी से बढ़ेगा। इसलिए यह आवश्यक है कि उपभोक्ताओं को सही मात्रा में ईंधन मिले और माप-तोल में कोई गड़बड़ी न हो। इसी उद्देश्य से नियमों में बदलाव किया गया है। संशोधन के बाद GATCs द्वारा जांच किए जाने वाले उपकरणों की संख्या 18 से बढ़ाकर 23 कर दी गई है, जिससे देशभर में जांच सेवाओं की उपलब्धता में वृद्धि होगी और कार्य में तेजी आएगी। मंत्रालय के अनुसार, यह कदम क्लीन एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में भी सहायक होगा.
जांच की लागत
नए नियमों के अनुसार, पेट्रोल और डीजल डिस्पेंसर की जांच के लिए 5,000 रुपये प्रति नोजल शुल्क निर्धारित किया गया है। वहीं, CNG, LPG, LNG और हाइड्रोजन डिस्पेंसर के लिए यह शुल्क 10,000 रुपये प्रति नोजल रखा गया है। मंत्रालय का कहना है कि इन फ्यूल सिस्टम्स में आधुनिक तकनीक का उपयोग होता है, इसलिए उनकी जांच प्रक्रिया अधिक विशेषज्ञता की मांग करती है.
GATCs वे निजी प्रयोगशालाएं और सुविधाएं हैं जिन्हें सरकार से मंजूरी प्राप्त होती है। इनके पास लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट के तहत वजन और माप उपकरणों की जांच करने की तकनीकी क्षमता होती है। इससे सरकारी एजेंसियों पर दबाव कम होगा और जांच प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सकेगी। सरकार ने राज्यों को भी अतिरिक्त अधिकार दिए हैं, जिससे वे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार GATC जांच के लिए नई उपकरण श्रेणियां अधिसूचित कर सकेंगी. इसके अलावा, संयुक्त सचिव और उससे ऊपर के अधिकारियों को मंजूरी देने का अधिकार देकर प्रक्रिया को तेज बनाने का प्रयास किया गया है.