भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के विकास के लिए नई नीतियों की आवश्यकता
इलेक्ट्रिक वाहनों की दिशा में भारत की यात्रा
ईकेए मोबिलिटी के मुख्य विकास अधिकारी रोहित श्रीवास्तव ने एक विशेष बातचीत में बताया कि भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता की दिशा में तेजी लाने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की बिक्री में तेजी आई है, जहां जून में पहली बार इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री 12 प्रतिशत को पार कर गई। इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, और तीन पहिया वाहनों में इलेक्ट्रिक का हिस्सा बढ़ रहा है।
श्रीवास्तव ने बताया कि सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि स्थायी नीतियों और तकनीकी स्वामित्व पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है। दिल्ली की नई EV नीति, जो 15,000 करोड़ रुपये के बजट के साथ लागू हुई है, को सराहा जाना चाहिए। यह नीति केवल इलेक्ट्रिक तीन पहिया और हल्के माल वाहनों के पंजीकरण को 2027 से अनिवार्य बनाती है।
ईकेए मोबिलिटी का मानना है कि भारी वाणिज्यिक वाहनों को इलेक्ट्रिक करना सबसे प्रभावी तरीका है। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी 24,000 इलेक्ट्रिक बसों को भारतीय शहरों में लाने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों में भाग ले रही है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एक सक्षम पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की आवश्यकता है, जिसमें औद्योगिक बुनियादी ढांचा, विश्वसनीय बिजली, और चार्जिंग नेटवर्क शामिल हैं।
श्रीवास्तव ने नीति निर्माताओं से अपील की कि वे इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि अगले पांच वर्षों में भारत को उत्पादन और तकनीकी क्षमताओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चुनौतियों का सामना करने के लिए, बैटरी सेल और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना आवश्यक है। इसके अलावा, उन्होंने वित्तीय बाधाओं को कम करने और बैटरी स्वैपिंग के लिए मानक बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।