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पुरुषोत्तम मास: धार्मिक महत्व और शुभ कार्यों की जानकारी

पुरुषोत्तम मास, जिसे मलमास भी कहा जाता है, का हिंदू पंचांग में विशेष महत्व है। यह भगवान विष्णु की आराधना का समय है, जिसमें मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। इस अवधि में भक्ति और साधना को प्राथमिकता दी जाती है। जानें इस मास के दौरान क्या कार्य करने चाहिए और किनसे बचना चाहिए।
 

हिंदू त्योहार कैलेंडर

हिंदू त्योहार कैलेंडर: अकोला के हिंदू पंचांग में अधिक मास, जिसे मलमास भी कहा जाता है, का विशेष महत्व है। इसे पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है और इसे भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित माना जाता है। इस समय में मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है, लेकिन भक्ति और साधना के लिए यह महीना अत्यंत शुभ माना जाता है।


पुरुषोत्तम मास का महत्व

पुरुषोत्तम मास 2026: जानें कब तक रहेगा मलमास और इसका धार्मिक महत्व


पुरुषोत्तम मास के दौरान किसी भी नए शुभ कार्य की शुरुआत से पहले पंचांग या ज्योतिषी से सलाह लेना आवश्यक है। इस समय में पुराने कार्यों को पूरा करना, घर की सफाई करना और आध्यात्मिक साधना पर ध्यान केंद्रित करना अधिक उपयुक्त होता है।


मलमास की अवधि

यह घटना लगभग हर 2.5 वर्ष में होती है


15 जून 2026 तक मलमास रहेगा, इसलिए शादी या अन्य महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की तिथियों को पहले से तय कर लेना फायदेमंद होगा। जब सूर्य की गति धीमी हो जाती है और चंद्र मास सूर्य मास से आगे निकल जाता है, तब अधिक मास आता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, यह घटना लगभग हर 2.5 वर्ष में होती है।


इस बार ज्येष्ठ मास में अधिक मास आ रहा है। शास्त्रों में इसे भगवान विष्णु का विशेष मास बताया गया है, इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास कहा जाता है।


शुभ कार्यों पर रोक

कुछ मान्यताएं


शादी, नए घर की नींव रखना, मुंडन संस्कार, जनेऊ संस्कार, नया व्यापार, दुकान या शोरूम शुरू करना, नया वाहन या संपत्ति खरीदना जैसे कार्यों को इस अवधि में अशुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इन कार्यों को पुरुषोत्तम मास में करने से जीवन में क्लेश, आर्थिक हानि और अशांति आ सकती है।


धार्मिक महत्व

पुरुषोत्तम मास को केवल निषेध का महीना नहीं, बल्कि भक्ति और साधना का महीना भी माना जाता है। इस दौरान किए गए कार्य शुभ फल देते हैं। भगवान विष्णु और लक्ष्मी की पूजा, अनाज, जल, तिल, कपड़े और फल का दान, विष्णु सहस्रनाम और पुरुषोत्तम मास व्रत, ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप इस समय में विशेष रूप से फलदायी होते हैं।


पुराणों में पुरुषोत्तम मास को विशेष काल बताया गया है। इस महीने में श्रद्धा से की गई पूजा, दान और व्रत सामान्य महीनों की तुलना में कई गुना अधिक फलदायी होते हैं। इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास कहा जाता है।