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पीलीभीत में चपरासी द्वारा 5.50 करोड़ रुपये का घोटाला, कई गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में एक चपरासी द्वारा 5.50 करोड़ रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है। मुख्य आरोपी इल्हाम उर रहमान शम्सी की तीन पत्नियों और अन्य महिलाओं को गिरफ्तार किया गया है। जांच में पता चला है कि आरोपी ने फर्जी बेनिफिशियरी आईडी बनाकर सरकारी राशि का हेरफेर किया। पुलिस ने संदिग्ध खातों में रखी गई राशि को फ्रीज कर दिया है। इस मामले में अधिकारियों की मिलीभगत भी सामने आई है, लेकिन अभी तक किसी अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई है।
 

पीलीभीत में बड़ा घोटाला

Pilibhit News: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में एक चपरासी द्वारा किए गए बड़े घोटाले ने हड़कंप मचा दिया है। जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय में काम करने वाले इल्हाम उर रहमान शम्सी पर 5.50 करोड़ रुपये की सरकारी राशि हड़पने का आरोप है। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी की तीन पत्नियों, साली, सास और दो अन्य महिलाओं को गिरफ्तार किया है। शुक्रवार शाम को पुलिस ने कोतवाली थाने से सात महिलाओं को हिरासत में लिया, जिनमें से एक पत्नी अर्शी खातून पहले ही जेल भेजी जा चुकी थी.


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इल्हाम, जो कि जनता टेक्निकल इंटर कॉलेज, बीसलपुर में तैनात था, DIOS कार्यालय से जुड़ा हुआ था और उसका काम वेतन बिल और टोकन जनरेशन देखना था। आरोप है कि उसने 2024 से फरवरी 2026 के बीच फर्जी बेनिफिशियरी आईडी बनाकर 98 ट्रांजेक्शन के माध्यम से लगभग एक करोड़ रुपये अपनी पत्नी के खाते में ट्रांसफर किए। जांच में यह राशि बढ़कर 5.50 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जो विभिन्न रिश्तेदारों और परिचितों के खातों में भेजी गई। पुलिस ने 53 संदिग्ध खातों में कुल 5.50 करोड़ रुपये को फ्रीज कर दिया है.


खातों में भेजी गई रकम


एएसपी विक्रम दहिया ने बताया कि घोटाले की राशि मुख्य रूप से निम्नलिखित खातों में ट्रांसफर की गई:



  • लुबना (दूसरी पत्नी): 2.37 करोड़ रुपये

  • आजरा खान (तीसरी पत्नी): 2.12 करोड़ रुपये

  • फातिमा (साली): 1.03 करोड़ रुपये

  • आफिया: 80 लाख से अधिक

  • नाहिद (सास): 95 लाख रुपये

  • परवीन खातून: 48 लाख रुपये

  • आशकारा परवीन: 38 लाख रुपये


पुलिस के अनुसार, घोटाले की कुछ राशि रियल एस्टेट में भी निवेश की गई है.


गिरफ्तार महिलाएं



  • लुबना (संभल)

  • आजरा खान (खुर्जा)

  • फातिमा नवी (लुबना की बहन)

  • नाहिद (आजरा की मां)

  • परवीन खातून (बिजनौर)

  • आशकारा आफिया खान (गाजियाबाद)

  • अर्शी खातून (पहले गिरफ्तार)


क्या अधिकारी बचेंगे?


इस घोटाले में DIOS कार्यालय, वित्त एवं लेखा अधिकारी और कोषागार के अधिकारियों की मिलीभगत स्पष्ट है। शासन स्तर पर एक टीम गठित की गई थी, लेकिन अब तक किसी अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है.