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पश्चिम बंगाल में पीएम विश्वकर्मा योजना का आगाज़, MSME क्षेत्र को मिलेगी नई ताकत

केंद्र सरकार की 'पीएम विश्वकर्मा' योजना अब पश्चिम बंगाल में लागू होने जा रही है, जिसका उद्देश्य कारीगरों को प्रोत्साहित करना है। इस योजना के तहत कारीगरों को आधुनिक उपकरण, वित्तीय सहायता और बेहतर बाजार अवसर प्रदान किए जाएंगे। हाल ही में हुई एक बैठक में योजना के कार्यान्वयन की रणनीतियों पर चर्चा की गई। जानें इस योजना के तहत अब तक कितने कारीगर पंजीकृत हो चुके हैं और इसके लाभ क्या होंगे।
 

पीएम विश्वकर्मा योजना का विस्तार

पश्चिम बंगाल में कारीगरों को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार की 'पीएम विश्वकर्मा' योजना लागू की जाएगी। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय ने इस संबंध में जानकारी साझा की। यह निर्णय राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनने के कुछ समय बाद लिया गया है। इस संदर्भ में, एमएसएमई मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव और विकास आयुक्त डॉ. रजनीश ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में योजना के कार्यान्वयन में तेजी लाने, लाभार्थियों की पहचान को बेहतर बनाने, कौशल विकास को सुदृढ़ करने और पारंपरिक कारीगरों तक पहुंच सुनिश्चित करने पर चर्चा की गई।


पीएम विश्वकर्मा योजना का इतिहास

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, बैठक में राज्य में अन्य एमएसएमई योजनाओं के कार्यान्वयन और संस्थागत समन्वय को बढ़ाने के लिए रणनीतियों पर भी विचार किया गया। मुख्य सचिव ने एमएसएमई मंत्रालय के सहयोग की सराहना की और केंद्रीय योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। 'पीएम विश्वकर्मा' योजना 17 सितंबर, 2023 को शुरू की गई थी। पश्चिम बंगाल सरकार ने इसके कार्यान्वयन के लिए राज्य स्तरीय निगरानी समिति और जिला स्तरीय कार्यान्वयन समितियों के गठन की अधिसूचना जारी की है।


पीएम विश्वकर्मा योजना का उद्देश्य

डॉ. रजनीश ने बताया कि यह योजना पारंपरिक कौशल के संरक्षण के साथ-साथ कारीगरों को आधुनिक उपकरण, औपचारिक वित्तीय सहायता और बेहतर बाजार अवसर प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में पारंपरिक शिल्प और कारीगरों की समृद्ध विरासत के कारण इस योजना के सफल कार्यान्वयन की संभावनाएं बहुत अधिक हैं। अब तक इस योजना के तहत 7.79 लाख कारीगर पंजीकृत हो चुके हैं। इस योजना के अंतर्गत कारीगरों को ऋण सहायता प्रदान की जाती है, साथ ही उनकी क्षमता, उत्पादकता और उत्पादों की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए बेहतर प्रशिक्षण और आधुनिक उपकरणों के लिए सहायता भी दी जाती है।