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चांदी के आयात पर नई पाबंदियां: सरकार का बड़ा कदम

केंद्र सरकार ने चांदी के आयात पर नई पाबंदियां लागू की हैं, जिससे कई श्रेणियों की चांदी को फ्री लिस्ट से हटा दिया गया है। यह कदम व्यापार घाटे को कम करने और विदेशी मुद्रा भंडार की सुरक्षा के लिए उठाया गया है। हाल ही में सोने और चांदी पर इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाई गई थी, जिससे चांदी की मांग में वृद्धि की आशंका है। जानें इस निर्णय के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
 

चांदी के आयात पर नई पाबंदियों की घोषणा

केंद्र सरकार ने चांदी के आयात पर नई पाबंदियां लागू कर दी हैं। कई श्रेणियों की चांदी को फ्री लिस्ट से हटा कर रिस्ट्रिक्टेड कैटेगरी में डाल दिया गया है। इसका अर्थ है कि अब इन श्रेणियों की चांदी का आयात पहले की तरह सरल नहीं रहेगा और इसके लिए अतिरिक्त मंजूरी की आवश्यकता हो सकती है.


आयात नियंत्रण का उद्देश्य

सरकार का यह निर्णय देश में कीमती धातुओं के बढ़ते आयात को नियंत्रित करने और व्यापार घाटे को कम करने के लिए लिया गया है। हाल के समय में सोने और चांदी के आयात पर बढ़ते दबाव ने विदेशी मुद्रा भंडार पर नकारात्मक प्रभाव डालने की चिंता को जन्म दिया है.


चांदी की बढ़ती मांग

सरकार को यह चिंता है कि सोने पर इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ने के बाद लोग चांदी की ओर अधिक आकर्षित हो सकते हैं। इसी कारण से चांदी के आयात पर सख्ती की गई है। हाल ही में, सोने और चांदी पर इम्पोर्ट ड्यूटी को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया गया था, फिर भी निवेशक चांदी की खरीद बढ़ा सकते हैं.


विदेशी मुद्रा की सुरक्षा

सरकार इस समय विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने और रुपये पर बढ़ते दबाव को कम करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। वैश्विक अनिश्चितताओं और बढ़ते आयात बिल के कारण सरकार सतर्क है.


आयात में गिरावट

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में सोने और चांदी का आयात लगभग 30 वर्षों के निचले स्तर पर पहुंच गया है। इसके पीछे ऊंची इम्पोर्ट ड्यूटी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतें मुख्य कारण मानी जा रही हैं। नई पाबंदियों के बाद आने वाले महीनों में चांदी के आयात में और गिरावट देखने को मिल सकती है.