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वंदे भारत एक्सप्रेस: भारतीय रेलवे की नई पहचान और बढ़ती मांग

वंदे भारत एक्सप्रेस, भारतीय रेलवे की एक प्रमुख सेवा, अब केवल तेज यात्रा का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण राजस्व स्रोत भी बन चुकी है। मार्च 2026 तक, 162 सेवाएं संचालित हो रही थीं, और यात्रियों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। गुजरात में इसकी कमाई के आंकड़े भी दर्शाते हैं कि यह सेवा कितनी सफल है। वंदे भारत की स्लीपर सेवा की शुरुआत ने लंबी दूरी की यात्रा के लिए भी इसकी मांग को बढ़ाया है। जानें इस सेवा की सफलता और भविष्य की संभावनाओं के बारे में।
 

वंदे भारत एक्सप्रेस की सफलता


भारतीय रेलवे की वंदे भारत एक्सप्रेस अब केवल तेज और आरामदायक यात्रा का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह रेलवे के लिए एक महत्वपूर्ण यात्री मांग और राजस्व का स्रोत बन चुकी है। मार्च 2026 में रेलवे के नेटवर्क पर 162 वंदे भारत चेयर कार सेवाएं उपलब्ध थीं, और जुलाई 2026 में सरकार ने इन सेवाओं की पुष्टि की। इसके साथ ही, दो वंदे भारत स्लीपर सेवाएं भी संचालित की जा रही थीं।


यात्रियों की संख्या में वृद्धि

रेलवे के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 4 करोड़ यात्रियों ने वंदे भारत सेवाओं का उपयोग किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 34 प्रतिशत अधिक है। अब तक, वंदे भारत ने 9.1 करोड़ से अधिक यात्रियों को यात्रा कराई है और लगभग एक लाख ट्रिप का आंकड़ा पार कर लिया है। कई रूटों पर इसकी ऑक्यूपेंसी 100 प्रतिशत से भी अधिक रही है।


यात्रियों की बढ़ती संख्या यह दर्शाती है कि वंदे भारत की मांग मजबूत बनी हुई है। इसी कारण रेलवे कई व्यस्त रूटों पर कोचों की संख्या बढ़ाकर अधिक यात्रियों को सीटें उपलब्ध कराने पर ध्यान दे रहा है।


विस्तृत नेटवर्क

वंदे भारत की शुरुआत 15 फरवरी 2019 को नई दिल्ली-वाराणसी रूट से हुई थी। इसके बाद यह सेवा देश के विभिन्न हिस्सों में तेजी से फैली। जुलाई 2026 तक, सरकार के अनुसार, 162 वंदे भारत चेयर कार सेवाएं देशभर में संचालित हो रही थीं। इन ट्रेनों में आधुनिक सुविधाएं, बेहतर सुरक्षा व्यवस्था, CCTV, KAVACH और तेज गति जैसी सुविधाएं शामिल हैं।


रेलवे ने कुछ रूटों पर 20 कोच वाली वंदे भारत ट्रेनों की संख्या भी बढ़ाई है। अप्रैल 2026 में रेलवे ने बताया कि 162 सेवाओं में 38 सेवाएं 20 कोच, 34 सेवाएं 16 कोच और 90 सेवाएं 8 कोच के साथ चल रही थीं।


गुजरात में कमाई का आंकड़ा

गुजरात में वंदे भारत की कमाई का एक उदाहरण सामने आया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2022 से मार्च 2026 के बीच गुजरात से संचालित छह जोड़ी वंदे भारत ट्रेनों में लगभग 73 लाख यात्रियों ने सफर किया और लगभग 722 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।


हालांकि, सभी वंदे भारत सेवाओं को जोड़कर इसे सीधे रेलवे के कुल मुनाफे के बराबर मानना सही नहीं होगा। ट्रेन की कमाई और रेलवे के शुद्ध लाभ में परिचालन, रखरखाव, स्टाफ, ऊर्जा और अन्य खर्च भी शामिल होते हैं। इसलिए इसे 'कैश काउ' के रूप में समझना बेहतर है, जो इसकी मजबूत मांग और कमाई की क्षमता को दर्शाता है।


बढ़ती मांग और ऑक्यूपेंसी

रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, वंदे भारत ट्रेनों में यात्री ऑक्यूपेंसी लगभग 100 प्रतिशत के आसपास पहुंच रही है। सरकार का कहना है कि इन ट्रेनों के किराए को कई अंतरराष्ट्रीय समान सेवाओं की तुलना में किफायती रखा गया है।


तेज यात्रा, बेहतर समयपालन, आधुनिक कोच और आरामदायक सीटिंग के कारण वंदे भारत की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। यही बढ़ती मांग रेलवे को अधिक कोच और नए रूट जोड़ने के लिए प्रेरित कर रही है।


स्लीपर वंदे भारत की शुरुआत

जनवरी 2026 में वंदे भारत स्लीपर सेवा की शुरुआत हुई। सरकार के अनुसार, शुरुआती तीन महीनों में पहली स्लीपर वंदे भारत ने 119 यात्राओं में लगभग 1.21 लाख यात्रियों को सफर कराया और 100 प्रतिशत ऑक्यूपेंसी दर्ज की। इससे यह संकेत मिलता है कि लंबी दूरी के प्रीमियम रेल सफर के बाजार में भी वंदे भारत के लिए मजबूत मांग मौजूद है।


कुल मिलाकर, वंदे भारत भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की एक प्रमुख परियोजना बन चुकी है। 162 सेवाओं का बड़ा नेटवर्क, लगातार बढ़ती यात्री संख्या और कई रूटों पर लगभग पूरी क्षमता के साथ संचालन इसे रेलवे के लिए एक महत्वपूर्ण राजस्व स्रोत बनाता है। हालांकि इसे सीधे 'रेलवे की सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली ट्रेन' कहना उपलब्ध सरकारी आंकड़ों से साबित नहीं होता, लेकिन मजबूत मांग और उच्च ऑक्यूपेंसी के चलते वंदे भारत रेलवे की कमाई के लिहाज से बेहद अहम सेवा बन गई है।