प्राचीन भारतीय देवताओं का प्रिय पेय: सोम और सुरा
प्राचीन काल में देवताओं का पेय
आजकल बाजार में कई प्रकार के शराब के ब्रांड उपलब्ध हैं, जैसे स्कॉच, वोडका, वाइन और बियर। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब देवताओं का युग था, तब इंद्र, अग्नि और वरुण जैसे देवता क्या पीते थे? हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हुई है, जो वेदों, पुराणों और महाभारत से जानकारी लेकर इस रहस्य को उजागर करती है।
प्राचीन समय में दो प्रमुख प्रकार के पेय पदार्थ होते थे: सोम और सुरा। सोम देवताओं की पसंदीदा शराब थी, और इंद्र देव को यह विशेष रूप से प्रिय थी। वेदों के अनुसार, जब इंद्र या अन्य देवता युद्ध पर जाते थे, तो वे सोमरस का सेवन करते थे, जिससे उन्हें अपार शक्ति और बल मिलता था। आइए जानते हैं उस समय के लोकप्रिय ब्रांड और उनकी रेसिपी।
सोम और सुरा: दो विशेष पेय
सोम का महत्व
प्राचीन काल में सोम और सुरा दो मुख्य पेय थे। सोम को लोग शराब समझते हैं, लेकिन यह एक गलत धारणा है। ऋग्वेद में सोम को 'दिव्य रस' कहा गया है। यह कोई नशा नहीं, बल्कि एक साइकोएक्टिव जड़ी-बूटी का रस था। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह एफेड्रा, सरकोस्टेमा या मशरूम जैसी पौधों से तैयार किया जाता था। इसे पीने से चेतना में वृद्धि होती थी, और देवता युद्ध से पहले इसे पीकर शक्ति का अनुभव करते थे। ऋग्वेद में सोम के लिए 250 से अधिक सूक्त हैं। सोम यज्ञ में चढ़ाया जाता था और इसे छानकर पिया जाता था। यह अल्कोहल नहीं, बल्कि एक प्रकार का 'दिव्य ऊर्जा पेय' था।
सुरा: असली शराब
अब बात करते हैं असली शराब, जिसे सुरा कहा जाता था। यह एक फर्मेंटेड ड्रिंक थी जिसमें अल्कोहल होता था। वेदों में उल्लेख है कि इसे जौ, चावल, गन्ना, फूल या फलों से बनाया जाता था। इसे बनाने की प्रक्रिया आज के बियर से काफी मिलती-जुलती है। अनाज को उबालकर, खमीर डालकर 7-15 दिन फर्मेंट किया जाता था। इसमें अल्कोहल की मात्रा 5-15% तक होती थी। महाभारत में पांडवों के यज्ञ में सुरा का उल्लेख है, और यह कौरवों की सभा में भी पी जाती थी। योद्धा इसे युद्ध से पहले पीते थे ताकि उनमें हिम्मत बढ़ सके। लेकिन देवता सोम का सेवन करते थे।
महत्वपूर्ण नोट
नोट: यह जानकारी पौराणिक मान्यताओं पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते।