भारत में हल्दी की पांच प्रमुख किस्में और उनके अद्भुत लाभ
भारत में हल्दी की विविधता
:काली हल्दी: काली हल्दी में कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। इसका बाहरी रंग गहरा होता है, जबकि अंदर से यह गहरे नीले रंग की होती है। आयुर्वेद में इसे औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है, जिसके कारण इसकी बाजार में कीमत अधिक है। इसका उपयोग विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार में किया जाता है। इसकी खेती मुख्य रूप से पूर्वोत्तर भारत, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश में होती है।
:अंबा हल्दी: इसे आम टरमरिक के नाम से भी जाना जाता है। इसकी खुशबू आम जैसी होती है और यह अदरक के समान दिखती है। इसका उपयोग आमतौर पर अचार, चटनी और सलाद में किया जाता है। आयुर्वेद में इसे अमरद्रकम या कर्पूरहरिद्रा कहा जाता है, जो भूख बढ़ाने, सूजन कम करने और पाचन में सुधार करने में सहायक मानी जाती है।
:कस्तूरी हल्दी: यह हल्दी त्वचा की समस्याओं जैसे मुंहासे, दाग-धब्बे और टैनिंग के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है। इसका रंग हल्का पीला या क्रीम जैसा होता है और इसकी खुशबू खस जैसी होती है। इसे कस्तूरी मंजाल और जंगली हल्दी के नाम से भी जाना जाता है। यह त्वचा की रंगत निखारने और कसाव लाने में मदद करती है।
:लाकाडोंग हल्दी: यह मेघालय के जयंतिया हिल्स में उगाई जाने वाली एक प्रीमियम किस्म है। इसका रंग गहरा नारंगी और सुगंध तेज होती है। इसमें करक्यूमिन की मात्रा अधिक होती है और इसे जीआई टैग भी प्राप्त है। इसे एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के लिए जाना जाता है और यह इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में भी काम करती है।
पीली हल्दी: यह हल्दी की सबसे सामान्य किस्म है, जिसका उपयोग दैनिक आहार में किया जाता है। विश्वभर में उगाई जाने वाली हल्दी का लगभग 70 से 75 प्रतिशत उत्पादन भारत में होता है। इसे मुख्य रूप से महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना में उगाया जाता है। यह स्वास्थ्य और त्वचा के लिए कई लाभ प्रदान करती है।
